मै तुम्हारा हुआ

 वो भी क्या ज़माना था जब हम तेरे हुआ करते थे

मशरूफ थे एक दूसरे में पता नहीं कहा और कैसे रहा करते थे

एक आज है जो वक़्त सा पलटा हुआ है 

कुछ मुझमे सिमटा है  

कुछ तुझमे लिपटा हुआ है।

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